
दिल्ली/ पटना/ रांची। प्रवासी मजदूरों और पढ़ाई के लिए अपने राज्यों से दूसरे राज्यों में गये छात्रों को घर लौटने का रास्ता साफ हो गया है। गृह मंत्रालय ने सशर्त छूट दे दी है। गृह मंत्रालय ने लाक डाउन के नियमों कुछ शर्तों के साथ लोगों की घर वापसी की छूट दे दी है। उत्तर प्रदेश, गुजरात र मध्यप्रदेश जैसे कई राज्यों द्वारा अपने लोगों को दूसरे राज्यों से वापस बुलाने की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद बाकी राज्यों की ओर से भी ऐसी मांग की जाने लगी थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी यह मांग की थी। नीतीश ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में यह मुद्दा उठाया तो हेमंत सोरेन ने पीएम को पत्र भेज कर इसकी मांग की थी।
नीतीश कुमार पर उनकी ही सरकार के साझीदार दल बीजेपी का भी दबाव बढ़ने लगा था। बीजेपी एमएलसी संजय पासवान ने आज ही कहा था कि नीतीश कुमार कोटा में फंसे बिहार के बच्चों को लाने की पहल करें। मुख्यमंत्री की यह जिम्मेवारी है और वे इससे बच नहीं सकते। ऐसा नहीं करने पर बीजेपी ने खतरे की ओर भी इशारा किया था कि इसी साल होने जा रहे चुनाव में इसका खामियाजा भोगना पड़ सकता है।
बीजेपी एमएलसी संजय पासवान ने कहा था कि कोटा में फंसे बच्चों को घर वापस लाना मुख्यमंत्री की जिम्मेवारी है। कोरोना के कहर के बीच बेजेपी के विधान परिषद सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने बिहार सरकार से कोटा में बच्चों को वापस लाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगर ऐसा नहीं करती है तो इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के मध्यवर्गीय परिवारों का कोई न कोई बच्चा कोटा में पढ़ने जाता है। यह चुनावी साल है। अगर सरकार ने 3 मई के पहले बच्चों को वापस लाने का काम नहीं किया तो इसकी कीमत चुनाव में चुकानी पड़ सकती है।
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