भाजपा में सब कुछ ठीकठाक नहीं, कभी फट सकता है गुस्से का गुबार

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  • मिथिलेश कुमार सिंह़

नयी दिल्ली। भाजपा में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। ऐसा कहना इसलिए वाजिब लगता है कि भाजपा के नेता ही अपने नेतृत्व की किरकिरी करने में लगे हैं। बागी होकर जो बाहर चले गये, उनकी बात छोड़ दीजिए, जो भीतर हैं, उनके भी बोल नेतृत्व के खिलाफ उनकी मंशा के पोल खोल रहे हैं। ऐसा किसके इशारे पर और क्यों हो रहा है, यह भाजपा के लिए गहन चिंतन का विषय है।

भाजपा अपने मूल चरित्र से पिछले पांच साल में कई बार भटकी है। एहसास होने पर उसने सुधार की कोशिश भी है, लेकिन अब पछताये होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत। पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने तो नरेंद्र मोदी का खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोल रखा है। उनके विरोध का आलम यह है कि भाजपा से उन्होंने सारे रिश्ते तोड़ लिये हैं। अलबत्ता उनके बेटे जयंत सिन्हा जरूर मोदी सरकार में मंत्री बने हुए हैं।

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भाजपा की शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने तो चार साल पहले ही सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी की थी कि देश इमरजेंसी की ओर बढ़ रहा है। नरेंद्र मोदी की ऐआलोचना करने वालों की कतार में अब नितिन गडकरी भी शामिल हो गये हैं। दाल के दिनों में उनके दो ऐसे बयान आये हैं, जो साबित करते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व से साफ और बेबाक छवि के नितिन गडकरी खफा हैं। गडकरी ने पहले कहा था कि त्रिशंकु लोकसभा के आसार बन रहे हैं और अब कह रहे हैं कि सपने दिखा-बेच कर हासिल की गयी कामयाबी टिकती नहीं। जनता किसी को कुरसी पर बिठाती है तो उसे कुरसी से उतारना भी आता है। उन्होंने तो यहां तक कटाक्ष कर दिया कि झूठे वादे करने वालों को जनता चौराहे पर पीटती भी है।

भाजपा के भीतर शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद ने काफी पहले कड़े तेवर अपना लिये थे। शत्रुघ्न ने तो यशवंत सिन्हा के साथ विपक्ष की कोलकाता में हुई रैली में शामिल होकर ऐलान कर दिया कि वह भाजपा को पसंद नहीं करते। यह अलग बात है कि भाजपा को उनके खिलाफ ऐक्शन लेने में चिंतन-मनन करना पड़ रहा है।

भाजपा की हाल्त भीतर से कितनी खस्ता है, उसके कुछ और नजीर हाल के दिनों में देखने को मिले हैं। उसके सहयोगी दल साथ छोड़ने लगे। पूर्वोत्तर में असम गण परिषद ने साथ छोड़ा तो महाराष्ट्र में शिवसेना ने किनारा कर लिया। शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत तो भाजपा के नेतृत्व से इतने खफा है कि एक अखबार को दिये इंटरव्यू में उन्होंने साफ कह दिया कि भाजपा के खिलाफ महाराष्ट्र से बाहर के प्रदेशों में भी शिवसेना के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। अलबत्ता एक बात कह कर उन्होंने सबको चौंका दिया कि नितिन गडकरी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की दोबारा सरकार बनेगी। गडकरी के बयानों को इससे जोड़ कर भी देखा जा सकता है।

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