
पटना। बिहार NDA में सब कुछ नहीं है। बिहार में नयी सरकार बनने के बाद BJP के बड़े नेता प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिल आये, पर नीतीश ताकते रह गये। इसके दो कारण हो सकते हैं। अव्वल तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके लिए BJP के केंद्रीय नेतृत्व से समय ही नहीं मांगा हो या उन्हें समय ही नहीं दिया गया हो। इसमें दूसरे कारण पर संदेह अधिक है।
ऐसा सोचने के पीछे की वजह यह है कि BJP कोटे से उपमुख्यमंत्री बने तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर ली। राज्यसभा के नवनिर्वाचित सांसद सुशील कुमार मोदी की मुलाकात अमित शाह से हो गयी, लेकिन अभी तक नीतीश कुमार को यह अवसर नहीं मिला। यह सामान्य सौहार्द की बात है कि जब किसी सूबे में नयी सरकार बनती है तो वहां का मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से जरूर मिलता है। बिहार में चूंकि NDA की सरकार है, इसलिए मुख्यमंत्री को BJP के केंद्रीय नेताओं से तो जरूर मुलाकात करनी चाहिए।
बिहार में नीतीश कुमार की हालत तो यह हो गयी है कि चुनाव बीतने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के लिए वह BJP की ओर टकटकी लगाये हुए हैं। उनका कहना है कि BJP जब लिस्ट देगी, तभी विस्तार संभव है। BJP की हालत यह है कि कोई नेता नीतीश कुमार को भाव ही नहीं दे रहा। नीतीश कुमार को एनडीए का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने वाले अमित शाह और जेपी नड्डा को बंगाल विधानसबा चुनाव को लेकर फुर्सत ही नहीं है। दूसरी श्रेणी के नेता भी बिहार आकर उनसे नहीं मिल रहे हैं। भूपेंद्र यादव पिछले महीने वैशाली में बीजेपी के चिंतन शिविर में शामिल हुए। लेकिन पटना से गुजरते समय उन्हें नीतीश से मुलाकात का वक्त नहीं मिला। तीन-चार दिन पहले मुलाकात हुई भी तो मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई बात नहीं हुई। इसलिए मुख्यमंत्री ने खुद उसके बाद मीडिया के सवाल के जवाब में कहा कि जब बीजेपी से सूची मिलेगी, तब न विस्तार होगा। यानी बिहार NDA नीतीश कुमार को महत्व नहीं दे रहा।
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इधर आरजेडी के नेता लगातार यह आशंका जाहिर कर रहे हैं कि नीतीश की सरकार ज्यादा दिनों की मेहमान नहीं। जेडीयू के डेढ़ दर्जन विधायकों के आरजेडी के संपर्क में रहने का दावा किया जा रहा है। यह बात तब और तेजी से उभरी है, जब अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के 6 विधायकों को उसकी साथी पार्टी बीजेपी ने अपने पाले में कर लिया। इस पर विपक्षी दल तो यहां तक कह रहे हैं कि बिहार में भी इसकी पुनरावृत्ति होगी। इसलिए नीतीश कुमार को महागठबंधन का साथ देकर तेजस्वी यादव को सीएम बना देना चाहिए और खुद प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार बनना चाहिए। हालांकि नीतीश कुमार ने इसे फालतू की बात करार देकर महागठबंधन के आफर को ठुकरा दिया है। जेडीयू के नये राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह और दूसरे नेताओं ने भी नीतश के स्वर में ही हामी भरी है।
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नीतीश का संकट लगातार गहराता जा रहा है। कभी नीतीश के खिलाफ चूं तक नहीं बोलने वाले उनके ही विधायक अब जुबान खोलने लगे हैं। भागलपुर जिले के दो विधायकों ने बेलगाम अपराध पर नीतीश सरकार की खुली आलोचना की है। बरारी के विधायक विजय कुमार सिंह ने क्राइम के बढ़ते ग्राफ के मद्देनजर जंगल राज तक कह दिया है। बीजेपी के विधायक-सांसद तो पहले से ही क्राइम के सवाल पर नीतीश कुमार को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। नीतीश कुमार इतने परेशान हैं कि वे लगातार पुलिस मुख्यालय पहुंच कर समीक्षा करते रहे हैं। सस्पेंशन और तबादले जैसे ऐक्शन भी खूब हो रहे हैं, लेकिन अपराध बेकाबू है।
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